विशेष वैदिक अनुष्ठान
ग्रहण दोष निवारण पूजा
कुंडली में सूर्य या चंद्र के साथ राहु/केतु होने पर

अगली उपलब्ध तिथियां
- शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 — शनि अमावस्या
- सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 — पूर्णिमा
- सोमवार, 9 नवंबर 2026 — सोमवती अमावस्या
- मंगलवार, 24 नवंबर 2026 — पूर्णिमा
- मंगलवार, 8 दिसंबर 2026 — अमावस्या
- गुरुवार, 7 जनवरी 2027 — अमावस्या
- शुक्रवार, 22 जनवरी 2027 — पूर्णिमा
परिचय
कुंडली में सूर्य या चंद्रमा के साथ राहु या केतु हो, या जन्म ग्रहण के समय हुआ हो, तो ग्रहण दोष बनता है। इससे आत्मविश्वास की कमी, चिंता, मन की अस्थिरता, माता-पिता से तनाव और सफलता में रुकावट जुड़ी मानी जाती है। शांति में सूर्य/चंद्र और राहु-केतु जाप, दान संकल्प और हवन होता है।
लाभ
- ग्रस्त सूर्य या चंद्र को बल
- चिंता और आत्म-संदेह से राहत
- पिता/माता से संबंधों में सुधार
यह पूजा किसे करानी चाहिए
- कुंडली में सूर्य या चंद्र के साथ राहु/केतु
- ग्रहण के समय जन्मे लोग
पूजा विधि
- संकल्प
- सूर्य/चंद्र पूजन और जाप
- राहु-केतु जाप
- हवन और दान
आपको क्या मिलेगा
- आपके नाम और गोत्र से संकल्प
- सत्यापित वैदिक पंडितों द्वारा पूजा
- 48 घंटे में पूजा का वीडियो
- ईमेल और टेलीग्राम पर बुकिंग अपडेट
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन
महाकालेश्वर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक और एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। प्राचीन अवंतिका नगरी उज्जैन भारतीय काल-गणना का केंद्र (शून्य रेखांश) रही है, इसलिए महाकाल को समय के स्वामी के रूप में पूजा जाता है। प्रातःकालीन भस्म आरती विश्वविख्यात है। महाकाल क्षेत्र में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और कालसर्प शांति अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
और पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या ग्रहण का दिन इस पूजा हेतु अच्छा है?
ग्रहण काल में जाप अत्यंत प्रभावी माना जाता है; हवन ग्रहण समाप्ति के बाद होता है।
क्या पूजा का वीडियो मिलेगा?
हाँ, संकल्प और पूजा का वीडियो सामान्यतः 48 घंटे में आपके बुकिंग पेज पर मिलता है।
क्या बुकिंग रद्द कर सकते हैं?
पूजा तिथि से 48 घंटे पहले तक रद्द करने पर पूरी राशि लौटाई जाती है। विवरण धनवापसी नीति में देखें।
पूजा वैदिक परंपरा और आस्था के अनुसार की जाती है। हम किसी विशेष परिणाम की गारंटी नहीं देते; परिणाम भाग्य, कर्म और प्रयास पर निर्भर करते हैं।

