महाकालेश्वर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक और एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। प्राचीन अवंतिका नगरी उज्जैन भारतीय काल-गणना का केंद्र (शून्य रेखांश) …
मत्स्य पुराण के अनुसार उज्जैन मंगल ग्रह की जन्मभूमि है और क्षिप्रा तट पर स्थित मंगलनाथ मंदिर उसी पवित्र स्थान पर है। मंगल दोष (मांगलिक दोष) निवारण के …
काल भैरव को उज्जैन का कोतवाल माना जाता है। यह मंदिर विश्वभर में प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ भगवान को मदिरा का भोग लगाया जाता है, जो कापालिक और अघोर परंपर…
हरसिद्धि 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ माता सती की कोहनी गिरी थी। नवरात्रि में हजार से अधिक दीपों से जगमगाते दो विशाल दीपस्तंभ अद्भुत दृश्य होते है…
स्वयंभू माने जाने वाले चिंतामण गणेश मालवा के प्राचीनतम गणेश मंदिरों में से एक हैं। नाम के अनुसार यहाँ गणेश जी चिंताओं का हरण करते हैं। क्षेत्र में नए …
सिद्धवट क्षिप्रा तट पर स्थित प्राचीन वटवृक्ष है, जो अक्षयवट (प्रयागराज), वंशीवट (वृंदावन) और गयावट (गया) के साथ देश के चार पवित्र वटों में गिना जाता ह…
सिद्धवट के पास स्थित ऋणमुक्तेश्वर महादेव की पूजा कर्ज (ऋण) से मुक्ति के लिए की जाती है। मान्यता है कि राजा हरिश्चंद्र ने यहाँ तप किया था। शनिवार को चन…
लखुंदर नदी तट पर स्थित नलखेड़ा का बगलामुखी मंदिर (उज्जैन से लगभग 100 किमी) देश के तीन प्रमुख बगलामुखी सिद्धपीठों में से एक है। दस महाविद्याओं में आठवी…
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी में ॐ आकार के मांधाता द्वीप पर स्थित है। महाकालेश्वर के साथ यह मध्यप्रदेश को दो ज्योतिर्लिंगों की भूमि बनाता है। यह…
गोदावरी उद्गम के निकट त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक तीन मुख हैं। नारायण नागबली, त्रिपिंडी श्राद्ध और कालसर्प दोष शा…
पिंडदान के लिए गया सर्वश्रेष्ठ तीर्थ है। विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के चरण चिह्न हैं और पितृ पक्ष में फल्गु नदी तट पर श्राद्ध से पितरों को मुक्ति…
चार धाम का द्वार हरिद्वार वह स्थान है जहाँ गंगा मैदान में प्रवेश करती है। हर की पौड़ी पर गंगा आरती, अस्थि विसर्जन और पितृ तर्पण यहाँ के सबसे पवित्र कर…