विशेष वैदिक अनुष्ठान
पितृ दोष निवारण पूजा, सिद्धवट उज्जैन
पितरों की शांति और पितृ ऋण से मुक्ति

🎉 विशेष अवसर: वट सावित्री व्रत — मंगलवार, 12 जून 2029
अगली उपलब्ध तिथियां
- मंगलवार, 29 सितंबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 4)
- बुधवार, 30 सितंबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 5)
- गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 6)
- शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 7)
- शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 8)
- रविवार, 4 अक्टूबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 9)
- सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 10)
- मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 11)
परिचय
जब पूर्वजों की आत्मा अशांत रहती है, अक्सर श्राद्ध न होने या पितृ ऋण के कारण, तब पितृ दोष बनता है। कुंडली में सूर्य या नवम भाव पर राहु, केतु या शनि का प्रभाव इसका संकेत है। पितृ दोष वाले परिवारों में संतान बाधा, बार-बार गर्भपात, कलह, आर्थिक रुकावट और अकारण बीमारियां देखी जाती हैं। क्षिप्रा तट का सिद्धवट पितृ कर्म के लिए देश के चार पवित्र वटों में से एक है। पूजा में पितृ तर्पण, पिंडदान, नारायण पूजन, विष्णु सहस्रनाम पाठ और हवन होता है।
लाभ
- पितरों को शांति मिलती है
- संतान, विवाह और धन की रुकावटें दूर होती हैं
- परिवार में सामंजस्य लौटता है
- पितरों का आशीर्वाद मिलता है
यह पूजा किसे करानी चाहिए
- जिनकी कुंडली में पितृ दोष है
- बार-बार अकारण समस्याएं झेल रहे परिवार
- जो माता-पिता का श्राद्ध नहीं कर पाए
- पितृ पक्ष या अमावस्या पर कोई भी
पूजा विधि
- पूर्वजों के नाम और गोत्र से संकल्प
- तिल और कुश से पितृ तर्पण
- सिद्धवट पर पिंडदान
- नारायण और विष्णु पूजन
- हवन और ब्राह्मण भोजन संकल्प
मंत्र
ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः
आपको क्या मिलेगा
- आपके नाम और गोत्र से संकल्प
- सत्यापित वैदिक पंडितों द्वारा पूजा
- 48 घंटे में पूजा का वीडियो
- ईमेल और टेलीग्राम पर बुकिंग अपडेट
सिद्धवट, उज्जैन
सिद्धवट क्षिप्रा तट पर स्थित प्राचीन वटवृक्ष है, जो अक्षयवट (प्रयागराज), वंशीवट (वृंदावन) और गयावट (गया) के साथ देश के चार पवित्र वटों में गिना जाता है। पिंडदान, तर्पण, नारायण बलि, पितृ दोष शांति और कालसर्प दोष पूजा के लिए यह प्रमुख तीर्थ है।
और पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पूर्वजों के नाम जरूरी हैं?
पिता, दादा और परदादा (और ज्ञात हो तो ननिहाल पक्ष) के नाम सहायक हैं, पर केवल गोत्र से भी पूजा हो सकती है।
सबसे अच्छा समय?
पितृ पक्ष और हर अमावस्या, विशेषकर सर्वपितृ और मौनी अमावस्या।
क्या पूजा का वीडियो मिलेगा?
हाँ, संकल्प और पूजा का वीडियो सामान्यतः 48 घंटे में आपके बुकिंग पेज पर मिलता है।
क्या बुकिंग रद्द कर सकते हैं?
पूजा तिथि से 48 घंटे पहले तक रद्द करने पर पूरी राशि लौटाई जाती है। विवरण धनवापसी नीति में देखें।
पूजा वैदिक परंपरा और आस्था के अनुसार की जाती है। हम किसी विशेष परिणाम की गारंटी नहीं देते; परिणाम भाग्य, कर्म और प्रयास पर निर्भर करते हैं।

