विशेष वैदिक अनुष्ठान
त्रिपिंडी श्राद्ध
पिछली तीन पीढ़ियों के पितरों हेतु जिनका श्राद्ध छूट गया

🎉 विशेष अवसर: पितृ पक्ष (श्राद्ध) — शनिवार, 22 सितंबर 2029
अगली उपलब्ध तिथियां
- मंगलवार, 29 सितंबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 4)
- बुधवार, 30 सितंबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 5)
- गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 6)
- शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 7)
- शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 8)
- रविवार, 4 अक्टूबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 9)
- सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 10)
- मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 — पितृ पक्ष (श्राद्ध) (दिन 11)
परिचय
त्रिपिंडी श्राद्ध पिछली तीन पीढ़ियों के उन पितरों की शांति के लिए किया जाने वाला काम्य श्राद्ध है जिनका वर्षों से श्राद्ध नहीं हुआ या जिनकी अकाल मृत्यु हुई। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक तीन पिंड अर्पित किए जाते हैं। यह परंपरागत रूप से त्र्यंबकेश्वर और सिद्धवट, उज्जैन में होता है।
लाभ
- तीन पीढ़ियों के पितरों को शांति
- असंतुष्ट पितरों से होने वाली बाधाएं दूर
- वर्षों से छूटे श्राद्ध हेतु अनुशंसित
यह पूजा किसे करानी चाहिए
- जिनका 3+ वर्ष से श्राद्ध छूटा है
- परिवार में अकाल मृत्यु हुई हो
पूजा विधि
- संकल्प और गणेश पूजन
- ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र पूजन
- तीन पिंडों का अर्पण
- तर्पण और दान
आपको क्या मिलेगा
- आपके नाम और गोत्र से संकल्प
- सत्यापित वैदिक पंडितों द्वारा पूजा
- 48 घंटे में पूजा का वीडियो
- ईमेल और टेलीग्राम पर बुकिंग अपडेट
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, नासिक
गोदावरी उद्गम के निकट त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक तीन मुख हैं। नारायण नागबली, त्रिपिंडी श्राद्ध और कालसर्प दोष शांति के लिए यह देश का सबसे प्रसिद्ध स्थान है।
और पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पूजा कहाँ होती है?
सामान्यतः त्र्यंबकेश्वर में; सिद्धवट उज्जैन चाहें तो नोट में लिखें।
क्या पूजा का वीडियो मिलेगा?
हाँ, संकल्प और पूजा का वीडियो सामान्यतः 48 घंटे में आपके बुकिंग पेज पर मिलता है।
क्या बुकिंग रद्द कर सकते हैं?
पूजा तिथि से 48 घंटे पहले तक रद्द करने पर पूरी राशि लौटाई जाती है। विवरण धनवापसी नीति में देखें।
पूजा वैदिक परंपरा और आस्था के अनुसार की जाती है। हम किसी विशेष परिणाम की गारंटी नहीं देते; परिणाम भाग्य, कर्म और प्रयास पर निर्भर करते हैं।

