विशेष वैदिक अनुष्ठान
गंडमूल नक्षत्र शांति पूजा
अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती में जन्म हेतु

अगली उपलब्ध तिथियां
- रविवार, 4 अक्टूबर 2026
- रविवार, 11 अक्टूबर 2026
- रविवार, 18 अक्टूबर 2026
- रविवार, 25 अक्टूबर 2026
- सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 — पूर्णिमा
- रविवार, 1 नवंबर 2026
- रविवार, 8 नवंबर 2026
- रविवार, 15 नवंबर 2026
परिचय
छह गंडमूल नक्षत्रों (अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती) के गंडांत में जन्मे बच्चे को गंडमूल दोष कहा जाता है। परंपरा अनुसार जन्म के 27वें दिन, जब वही नक्षत्र लौटता है, शांति की जाती है, पर बाद में भी हो सकती है। इसमें नक्षत्र देवता पूजन, 27 औषधियों से स्नान संकल्प, जाप और हवन होता है।
लाभ
- गंडांत जन्म के प्रभाव की शांति
- बच्चे की रक्षा और अच्छा स्वास्थ्य
- माता-पिता और परिवार को शांति
यह पूजा किसे करानी चाहिए
- गंडमूल नक्षत्र में जन्मे बच्चे या वयस्क
पूजा विधि
- संकल्प
- नक्षत्र देवता और नवग्रह पूजन
- नक्षत्र मंत्र जाप
- हवन
आपको क्या मिलेगा
- आपके नाम और गोत्र से संकल्प
- सत्यापित वैदिक पंडितों द्वारा पूजा
- 48 घंटे में पूजा का वीडियो
- ईमेल और टेलीग्राम पर बुकिंग अपडेट
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन
महाकालेश्वर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक और एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। प्राचीन अवंतिका नगरी उज्जैन भारतीय काल-गणना का केंद्र (शून्य रेखांश) रही है, इसलिए महाकाल को समय के स्वामी के रूप में पूजा जाता है। प्रातःकालीन भस्म आरती विश्वविख्यात है। महाकाल क्षेत्र में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और कालसर्प शांति अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
और पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या बाद में करा सकते हैं?
हाँ, जन्म के समय न हुई हो तो कभी भी जन्म नक्षत्र वाले दिन करा सकते हैं।
क्या पूजा का वीडियो मिलेगा?
हाँ, संकल्प और पूजा का वीडियो सामान्यतः 48 घंटे में आपके बुकिंग पेज पर मिलता है।
क्या बुकिंग रद्द कर सकते हैं?
पूजा तिथि से 48 घंटे पहले तक रद्द करने पर पूरी राशि लौटाई जाती है। विवरण धनवापसी नीति में देखें।
पूजा वैदिक परंपरा और आस्था के अनुसार की जाती है। हम किसी विशेष परिणाम की गारंटी नहीं देते; परिणाम भाग्य, कर्म और प्रयास पर निर्भर करते हैं।

